सुबह की ब्लैक कॉफ़ी और न्यूज़ पेपर काफी पुराना रिश्ता है दुआ सलाम के बिना दिन स्टार्ट नहीं होता , पेपर में अक्सर दिल दहला देने वाली खबरे भी बड़ी सारी होती है वेसे ही आज ब्लास्ट और आतंक की ख़बर थी ...... आज के जो हालात है हर तरफ ब्लास्ट कर्फुयु तबाही ... क्यू किस के लिए ऐसा क्या है , जो हम हासिल करना चाहते है . अपनी सुरक्षा ? तो फिर एक जानवर और इन्सान में क्या फर्क रह गया . जिंदा रहने के लिए एक दुसरे को मारना कहा तक सही है . सब की आँखों पर अपना अपना चश्मा है . लेकिन सब में एक बात कॉमन है वो ये है की हालात . वो जी ऐसा हो गया था वेसा हो गया था .... सिर्फ इन्सान ही ऐसा है जिस के पास दिमाग है सोच समझ कर परिस्थितियों को बदल सकता है . धूप छाँव तो सब के हिस्से में है . हमे बचपन से ही सिखाया जाता है की बुरा मत करो , भगवान सब देख रहे है वो सजा दे गे . जब भगवान है रब है अल्लाह है जो सब देख रहा है वही सब से सही फेंसला लेत...